झूमे थे….झूमे रहे हैं…..झूमेंगे

बिसात बिछाने वाले तो बिसात ही बिछायेंगे।

फर्क नहीं पड़ता हमें हम तो देश की खातिर कुछ भी कर जायेंगे।।

हम बात कर रहे हैं उन भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ियों की, जिनके खेलने के अंदाज पर जाति-सम्प्रदाय को भूलकर हमने तालियां बजायी थीं,बजा रहे हैं और बजाते रहेंगे। इसका कारण यह है कि खिलाड़ियों में सिर्फ एक बात रहती है और वो रहती है भारतीयता की,भारत को जीताने की।

सोचिए जरा नवाब पटौदी, अजहरुद्दीन, अरशद अय्यूब, जहीर खान, इरफान पठान, युसूफ पठान, मौहम्मद शमी आदि के बारे में, जिन्होंने न जाने कितनी बार हम सभी को हंसने, गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया है। सर्वप्रथम पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन को देखिए जिन्होंने 99 टेस्ट मैच खेलकर,22 शतक तथा 21अर्धशतक के साथ कुल 6215 रन 45.04 की औसत से,वन डे में 334 मैचों में 9378 रन , जिसमें 7 शतक तथा 58 अर्द्धशतक शामिल हैं, बनाए। इन्हें कलाई का विशेषज्ञ कहा जाता था चाहे वो बल्लेबाजी हो या फिल्डिंग। फिल्डिंग में अपने दौर में इनका कोई सानी नहीं था। अरशद अय्यूब भारत के सर्वश्रेष्ठ कंजूस आफ स्पिनर रहे हैं,जिनका गेंदबाजी इकानामी टेस्ट में 2.36 तथा वन डे में 4.12 का रहा है ,जो वाकई लाजवाब है।

झूमे थे….झूमे रहे हैं…..झूमेंगे
झूमे थे….झूमे रहे हैं…..झूमेंगे

उक्त दोनों की ही भांति क्या कोई भारतीय क्रिकेट प्रेमी जहीर, इरफान, युसूफ, शमी को भला भूल सकता है? शायद नहीं। जहीर खान के साथ जवागल श्रीनाथ व वेंकटेश प्रसाद की जुगलबंदी  ने भारत को कई यादगार जीत दिलाई है। रिकॉर्ड पर गौर करें। 92 टेस्ट 311विकेट,200 वन डे 282 विकेट। टेस्ट में दस विकेट एक बार तथा पांच विकेट ग्यारह बार।टी-20 में सत्रह मैचों में 17 विकेट, इकानामी 7.64। कई बार छक्कों की बरसात कर भी मैच जिताया इन्होंने। नहीं भूल सकते इन्हें। इसी तरह आज कमेंटेटर के रोल में नजर आ रहे इरफान पठान,जो कभी श्रेष्ठ आलराउंडरों में गिने जाते थे। हैट्रिक लगाकर, अपनी स्विंग के सहारे कई बार विपक्षियों के मुंह से मैच छिन लिया इन्होंने। रिकॉर्ड की बात करें तो 29 टेस्ट मैचों में 100 विकेट,दस विकेट दो बार तथा पांच विकेट सात बार हासिल किया।वन डे में 120 मैचों में173 विकेट, पांच विकेट दो बार हासिल किया। टेस्ट मैचों में इनके नाम एक शतक तथा छः अर्ध़शतक दर्ज हैं, साथ ही वन डे में इरफान ने पांच अर्द्धशतक लगाया। इनके भाई युसूफ पठान ने भी भारत को मुस्कुराने के अनेक अवसर प्रदान किया। इन्होंने 57 वन डे में 810 रन बनाए दो शतक व तीन अर्द्धशतक के साथ।

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झूमे थे….झूमे रहे हैं…..झूमेंगे

फिर मौहम्मद शमी जो आज के दौर में जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, इशांत शर्मा,भुवी,सैनी,चाहर, शार्दुल के साथ भारतीय तेज गेंदबाजी के आधार-स्तंभ हैं। अक्सर हम भारतवासी उनके अद्भुत प्रदर्शन से अचंभित हो जाते हैं, खुशी से झूमने लगते हैं। हालिया न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीसरे टी-20 मैच का अंतिम ओवर एक छोटा- सा उदाहरण है,जब मैच को सुपर ओवर में लेकर चले गए वो। भारत ने अंततः वह मैच जीता।शमी के अभी तक के रिकार्ड को देखिए। 47 टेस्ट मैचों में 175 विकेट, पांच विकेट पांच बार,76 वन डे में 143 विकेट, पांच विकेट एक बार,11 टी-20 मैच में 12 विकेट लाजवाब शमी की कहानी जारी है।

कहना सिर्फ यहां यह है कि जब हमारे खिलाड़ी  भारतवर्ष के नाम को रौशन भारतवासी होने के नाते करते हैं तो हम सब भी क्यों नहीं अपने मन-मस्तिष्क से जाति,सम्प्रदाय,धर्म आदि के भेदभाव को समाप्त कर दें और सिर्फ भारतीयता के हिसाब से ही सोचें और गर्व से कहें –  झूमे थे ….झूम रहे हैं…..झूमते रहेंगे।

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